Showing posts with label रेल यात्रा. Show all posts
Showing posts with label रेल यात्रा. Show all posts

Friday, August 11, 2017

तिरुपति से चेन्नई होते हुए रामेश्वरम की ट्रेन यात्रा

तिरुपति से चेन्नई होते हुए रामेश्वरम की ट्रेन यात्रा 






तिरुमला स्थित भगवान् वेंकटेश्वर और तिरुपति स्थित देवी पद्मावती के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात हमारा अगला पड़ाव रामेश्वरम था, जिसके लिए हमें पहले तिरुपति से चेन्नई सेंट्रल तक एक ट्रेन के सफर के बाद चेन्नई एग्मोर से रामेश्वरम तक का सफर दूसरे ट्रेन से करना था। दोनों ट्रेन की हमारी बुकिंग पहले से ही थी इसलिए सीट की भी कोई चिंता नहीं थी। पद्मावती मंदिर के दर्शन करके मन में एक नई ऊर्जा भर गई थी, क्योंकि इस जगह पर जाने के लिए न तो मैंने सोचा था और न ही यहाँ जाने की कोई योजना थी और हम थोड़े से खाली समय का सदुपयोग करके इस मंदिर के दर्शन भी कर लिया। शायद इस मंदिर के दर्शन न करता और बाद में लोगों से ये सुनता कि जितना समय हमारे पास था उससे कम समय में इस मंदिर के दर्शन किये जा सकते थे तो बाद में बहुत अफ़सोस होता, पर अब कोई अफ़सोस नहीं था। अब अगर कुछ था तो एक नयी ऊर्जा के साथ आगे की यात्रा के लिए बढ़ना। हमारी ट्रेन 10 बजे थे और 9:30 बज चुका था और हमें यहाँ से निकलकर स्टेशन के लिए प्रस्थान करने का समय हो चुका था। 

Friday, July 21, 2017

चेन्नई से तिरुमला

चेन्नई से तिरुमला


चेन्नई के बाद हमारा अगला पड़ाव तिरुमला था, जहाँ पहुँच कर रात में रुकना था और अगले दिन भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करना था। चेन्नई से तिरुपति तक का सफर ट्रेन और तिरुपति से तिरुमला तक का सफर बस से करना था। भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर तिरुमला की पहाड़ियों में स्थित है जो तिरुपति से बस से द्वारा 22 किलोमीटर और पैदल जाने वाले के लिए 10 किलोमीटर की चढ़ाई है। तिरुपति से तिरुमला पर्वत पर गाड़ियों के लिए जाने का अलग और आने का अलग मार्ग है, मतलब एकतरफा रास्ता है। वैसे चेन्नई से तिरुपति तक बस या ट्रेन दोनों से जाया जा सकता है। चेन्नई से तिरुपति की बसें बहुतायत में मिलती है। तिरुपति के पास में रेलवे का बड़ा स्टेशन रेनिगुंटा है, जहाँ के लिए चेन्नई से दर्जन भर से ज्यादा ट्रेनें है पर तिरुपति के लिए कुछ ही ट्रेन है।आप अगर ट्रेन से जा रहे हैं तो रेनिगुंटा या तिरुपति दोनों जगह से आपको तिरुमला के लिए बस और जीप बहुत आसानी से और बहुतायत में मिलती है। चेन्नई से तिरुपति की हमारी ट्रेन दोपहर 2:15 बजे थी और करीब 1:30 बजे हम वेटिंग रूम से प्लेटफार्म पर आकर ट्रेन का इंतज़ार करने लगे। 

Friday, July 7, 2017

दिल्ली से चेन्नई : एक लम्बी ट्रेन यात्रा

दिल्ली से चेन्नई : एक लम्बी ट्रेन यात्रा



4 महीने से जिस दिन का इंतज़ार कर रहा था आख़िरकार वो दिन आ गया। आज रात 10 बजे तमिलनाडु एक्सप्रेस से चेन्नई के लिए प्रस्थान करना था। मम्मी पापा एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। यात्रा की सारी तैयारियां भी लगभग पूरी हो चुकी थी। मैं सुबह समय से ऑफिस  के लिए निकल गया। चूंकि ट्रेन रात में 10:30 बजे थी इसलिए ऑफिस से भी समय से पहले निकलने की कोई जल्दी नहीं थी, पर ये घुम्मकड़ मन कहाँ मानता है और 4 बजे ही ऑफिस से निकल गया। घर आकर तैयारियों का जायजा लिया और बची हुई तैयारियों में लग गया। 7 बजे तक सब कुछ तैयार था, बस अब जाते समय सामान उठाकर निकल जाना था। साढ़े सात बजे तक सब लोग खाना भी खा चुके और 9 बजने का इंतज़ार करने लगे। अभी एक घंटा समय हमारे पास बचा हुआ था और इस एक घंटे में मेरे मन में अच्छे-बुरे खयाल आ रहे थे, अनजान जगह पर जहाँ भाषा की समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है उन जगहों पर पता नहीं क्या क्या समस्या आएगी। इसी उधेड़बुन में कब एक घंटा बीत गया पता नहीं चला।

Saturday, May 20, 2017

पठानकोट से दिल्ली (Pathankot to Delhi)

पठानकोट से दिल्ली (Pathankot to Delhi)


इस पोस्ट को लिखने से पहले मैं बार बार यही सोच रहा था कि मैं अगर इससे पीछे वाली पोस्ट को ही अगर मैं थोड़ा और बड़ा कर देता तो ये पोस्ट लिखनी नहीं पड़ती, और अगर उसी पोस्ट में इसे जोड़ भी देता तो शायद पोस्ट लम्बी और उबाऊ हो जाती।  खैर रहने दीजिये इन बातों को, इन बातों का कोई निष्कर्ष तो निकलने वाला है नहीं तो उसके बारे में बोलने या लिखने से क्या फायदा। अब आज की यात्रा की बात करते हैं। 

5 दिन पहले में जिस सफर की शुरुआत की थी आज उसके अंजाम तक पहुँचने का दिन आ चुका था। कल पूरे दिन बस और ट्रेन का सफर (करीब 110 किलोमीटर बस और करीब 220 किलोमीटर ट्रेन का सफर) और इधर उधर की भागा-दौड़ी का ये प्रभाव हुआ कि आज सुबह उठने का मन बिलकुल नहीं हो रहा था। 4 :30 बजे अलार्म बजने के साथ ही नींद टूटी तो मैं अलार्म बंद करके फिर सो गया, दूसरी बार अलार्म 5:00 बजे बजा तो उठा और 5:30 बजते बजते जल्दी जल्दी नहा धोकर तैयार हुआ और ये सोचकर स्टेशन से बाहर गया कि कुछ खा-पी लिया जाये क्योकि ट्रेन पर का खाना मुझे बिलकुल पसंद नहीं है, यदि यहाँ नहीं खाया तो पूरे दिन बिना कुछ खाये ही रहना पड़ेगा। स्टेशन से बाहर जाकर भी निराशा ही हाथ लगी, एक चाय की दुकान तक नहीं खुली थी, इधर उधर देखा और कुछ दूर तक भी गया फिर भी कुछ खाने पीने के लिए नहीं मिला। एक कहावत है न कि अपना सा मुँह बना लेना, वही मेरे साथ हुआ, जिसे फुर्ती से मैं स्टेशन से बाहर चाय पीने गया था और कुछ न मिलने के कारण उसी फुर्ती से मुँह बना कर वापस आ गया। 

Saturday, May 6, 2017

बैजनाथ महादेव से पठानकोट (Baijnath to Pathankot)

बैजनाथ महादेव से पठानकोट 
(Baijnath to Pathankot)




इतने दिन से घूमते हुए अब वो घड़ी आ गयी जब हमें वापस जाना होगा। ज्वालादेवी, धर्मशाला, मैक्लोडगंज, भागसू नाग वाटर फॉल, चिंतपूर्णी देवी और बैजनाथ महादेव की यात्रा पूरी करके और कुछ खट्टी-मीठी यादें लेकर और कुछ को अपने कैमरे में कैद करके बुझे मन से वापसी की राह पकड़नी थी। बैजनाथ मंदिर देखने के बाद वहां से बस से हम पपरोला आ चुके थे। 

पपरोला बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन की दूरी महज 100 मीटर ही है। मैं स्टेशन पंहुचा तो यहाँ का नज़ारा ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी निर्जन प्रदेश में आ गए। स्टेशन के बाहर-भीतर और यहाँ तक प्लेटफार्म पर भी कोई मानव नहीं दिख रहा था, अरे मानव तो क्या कोई और जंतु भी दिख जाता तो लगता कि कुछ दिखा। अगर कुछ दिख रहा था यार्ड में खड़ी ट्रेन की 2 इंजन और ट्रेनें। मन तो कर रहा था कि स्टेशन के बोर्ड पर जो "बैजनाथ पपरोला" लिखा हुआ है उसे मिटाकर "निर्जन पपरोला" कर दें, पर ऐसा करना सरकारी संपत्ति का नुकसान करना होता, इसलिए नहीं लिखे। 

Monday, April 10, 2017

काँगड़ा वैली ट्रेन यात्रा (Kangra Valley Train Journey)

काँगड़ा वैली ट्रेन यात्रा (Kangra Valley Train Journey)



पठानकोट से ज्वालामुखी रोड (Pathankot to Jwalamukhi Road)

पठानकोट में ट्रेन से उतरने के बाद टिकट लेकर और कुछ फोटो खीचने के बाद मैं सीधा प्लेटफार्म 4 पर चला गया। अभी सुबह के 8 :45 बजे थे। वहां पहले से ही एक ट्रेन लगी थी। मैंने गार्ड से पूछा तो उसने बताया कि ये तो अभी आयी ही है। ये ट्रेन यार्ड में जाएगी और जो जाएगी वो कुछ देर में यहाँ लगा दी जाएगी। मैं पहली बार इतनी छोटी ट्रेन देख रहा था। ट्रेन की पटरियों की चौड़ाई बहुत ही कम थी। देखकर मन प्रफुल्लित हो रहा था। बस जल्दी से ट्रेन में बैठ जाने का मन रहा था। वहीं पर एक चाय की दुकान थी मैंने एक कप चाय लिया और पीने लगा। मेरी चाय ख़त्म होने से पहले ही पहले वहां खड़ी ट्रेन को एक इंजन खीचकर यार्ड की तरफ ले गया। यार्ड में खड़ी दूसरी ट्रेन प्लेटफार्म पर लगा दी गयी। मैं जल्दी से ट्रेन में घुसा और खिड़की के पास वाली सीट पर बैठ गया। 

Thursday, April 6, 2017

दिल्ली से पठानकोट (Delhi to Pathankot)

दिल्ली से पठानकोट (Delhi to Pathankot)



आख़िरकार इंतज़ार ख़तम हुआ और यात्रा की तिथि आ ही गयी। ट्रेन पुरानी दिल्ली (दिल्ली जंक्शन) से रात 11:45 पर थी। रोज तो ऑफिस से मैं करीब 8 बजे आता था। आज जाना था इसलिए ऑफिस से 6 बजे ही निकल गया। करीब 6:30 बजे मैं घर पहुँच गया। अब तक कंचन पैकिंग का सारा काम कर चुकी थी। मुझे 4 दिन बाहर रहना था इसी हिसाब उसे उसने इतना खाने-पीने का सामान दे दिया था कि इतने में बिना कहीं किसी होटल में खाना खाये भी मेरा गुजारा हो जाये। 


9:15 बजे मैं घर से निकला और सीधा मेट्रो स्टेशन पहुँच गया। मेट्रो में जो भीड़ होती है उसके कारण मुझे मेट्रो से कहीं भी आना जाना पसंद नहीं है पर ये सोचकर कि रात ज्यादा हो गयी है तो भीड़ कुछ कम मिलेगी इसलिए मेट्रो से जाने का इरादा किया और मेरा ये अंदाज़ सही निकल जब प्लेटफार्म पर पहुंचे तो कुछ ही लोग थे और जो मेट्रो आयी भी वो भी 8 कोच की जिसके कारण मेट्रो के अंदर भीड़ ज्यादा नहीं हो सकी। पर जैसे जैसे स्टेशन आ रही थी मेट्रो के अंदर भीड़ बढ़ती जा रही थी और उसका कारण एक ही था कि हरेक स्टेशन पर चढ़ने वाले यात्री तो थे पर उतरने वाले यात्री एक भी नहीं थे। इसी तरह बाराखंभा रोड स्टेशन आते आते भीड़ इतनी हो गयी कि अब खड़े होने मुश्किल हो रहा था। अब मन में मैं बस यही सोच रहा था कि काश मैं ऑटो से आ जाता तो ये गति नहीं होती हमारी।